कुछ इस तरह मशरूफ रहते हैं

Friday, October 7, 2011 · Posted in


कुछ इस तरह मशरूफ रहते हैं, तेरे ख्वाबों में अब,
 कि तनहा होकर भी, खालीपन का एहसास नहीं आता .
 साफ़ नज़र आता है, सादी दीवारों पर चेहरा तेरा ,
 तस्वीर सजाकर उसे धुंधला करना, अब रास नहीं आता

तुम्हारे हर राज की हमराज बन जाना चाहती हूँ ,

Wednesday, October 5, 2011 · Posted in


तुम्हारे हर राज की हमराज बन जाना चाहती हूँ ,
तुम्हारी आँखो के ख्याब बन जाना चाहती हूँ मै,
तुम्हारे कदमो की आहट बन जाना चाहती हूँ मै,
तुम्हारे दिल का हर अहसास हो जाना चाहती हूँ मै,
तुम्हारे मन का विश्वास  बन जाना चाहती हूँ...!

इस कदर हम यार को मनाने निकले!


इस कदर हम यार को मनाने निकले!
उसकी चाहत के हम दिवाने निकले!
जब भी उसे दिल का हाल बताना चाहा!
उसके होठों से वक़्त न होने के बहाने निकले

अंगड़ाई पर अंगड़ाई लेती है रात जुदाई की


अंगड़ाई पर अंगड़ाई लेती है रात जुदाई की
तुम क्या समझो तुम क्या जानो बात मेरी तन्हाई की
कौन सियाही घोल रहा था वक़्त के बहते दरिया में
मैंने आँख झुकी देखी है आज किसी हरजाई की
वस्ल की रात न जाने क्यूँ इसरार था उनको जाने पर
वक़्त से पहले डूब गए तारों ने बड़ी दानाई की
उड़ते-उड़ते आस का पंछी दूर उफ़क़ में डूब गया
रोते-रोते बैठ गई आवाज़ किसी सौदाई की...

गम ही गम मिला है सुबह शाम मुझे यारो


गम ही गम मिला है सुबह शाम मुझे यारो...
 उनकी यादों मे सोए है सुबह शाम यारो...
 ये जिंदगी अगर घुट के ही कटनी है अगर यारों...
 तो इस बेजान जिंदगी को सलाम यारों...

जागते है हम तन्हा रातों मे...


जागते है हम तन्हा रातों मे...
खोता है दिल उनकी बातों मे...
मिली नही दिल की मंज़िल आज तक...
क्यूंकी दर्द ही दर्द लिखा है इन हाथों मे...
दर्द की किताब है मेरी जिंदगी.

मेरा नसीब मुझसे खफा हो जाता है...


मेरा नसीब मुझसे खफा हो जाता है...
अपना जिसे मानु वो बेवफा हो जाता है...
शिकायत मुझे हमेशा रात से है...
ख्वाब पूरा होता नही की सवेरा हो जाता है..

दिल मे आता है जब ख़याल उनका


दिल मे आता है जब ख़याल उनका...
 तस्वीर से पूछते है फिर हाल उनका...
 वो कभी हमसे पूछा करते थे जुदाई क्या है...
 आज समझ मे आया सवाल उनका